Home Home साबरमती ब्लास्ट के दो आरोपित 17 साल बाद बरी

साबरमती ब्लास्ट के दो आरोपित 17 साल बाद बरी

लखनऊ. अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने के दो आपराधिक मामलों की सुनवाई शनिवार से लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में शुरू हो गई। महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल व धर्मदास को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेने के बाद जमानत दे दी। फैजाबाद में 17 साल पहले रौजागांव रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट के मामले में दो आरोपितों- मो. अब्दुल मुबीन व अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व रिसर्च स्कॉलर गुलजार अहमद वानी उर्फ इरशाद को बाराबंकी की अदालत ने बेगुनाह करार दिया है।

अयोध्या मामले की सुनवाई लखनऊ में शुरू, 5 को जमानत, कोर्ट ने राज्य सरकार से दोनों को क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा

महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल व धर्मदास को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेने के बाद जमानत दे दी। साबरमती एक्सप्रेस में हुए ब्लास्ट के मामले में दो आरोपितों- मो. अब्दुल मुबीन व अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व रिसर्च स्कॉलर गुलजार अहमद वानी उर्फ इरशाद को बाराबंकी की अदालत ने बेगुनाह करार दिया है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से दोनों को क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा है। साथ ही जांच में लापरवाही के आरोप में विवेचकों पर ऐक्शन लेने की सिफारिश भी की है। अपर जिला जज एमए खान ने शनिवार को 27 पेज के फैसले में कहा कि विवेचकों रवींद्र नाथ सिंह व वीके सिंह ने ऐसा कोई सबूत नहीं जुटाया जिससे आरोपितों के वारदात में शामिल होने या साचिश रचने

कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार चाहे तो जांच में लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों से क्षतिपूर्ति की रकम वसूल सकती है। अगर राज्य सरकार मुआवजा देने में नाकाम रहती है तो दोनों युवक हाई कोर्ट जा सकते हैं।

‘पुलिस से वसूल लें रकम’

कोर्ट ने राज्य सरकार से दोनों को क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा है। साथ ही कहा कि यदि सरकार पैसा नहि देति है तो पोरि रकम पुलिस से वसुल क्र दोनो को दे। देशद्रोह के मामले में राज्य या केंद्र सरकार के सक्षम स्तर से अभियोजन की मंजूरी भी चार्जशीट दाखिल करने से पहले नहीं ली गई। पर्यवेक्षण अधिकारियों ने भी चार्जशीट की खामियां दूर नहीं कीं, वे भी लापरवाही के दोषी हैं।