Home उत्तर-प्रदेश करंसी से आफत बैंक सिक्के और छोटे नोट नहीं ले रहे, घरों...

करंसी से आफत बैंक सिक्के और छोटे नोट नहीं ले रहे, घरों में लगा ढेर

करंसी से आफत बैंक सिक्के और छोटे नोट नहीं ले रहे, घरों में लगा ढेर
करंसी से आफत बैंक सिक्के और छोटे नोट नहीं ले रहे, घरों में लगा ढेर

बैंक सिक्के और 50 से कम छोटे नोट जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं। व्यापारियों समेत अन्य लोगों के पास सिक्कों के ढेर लग चुके हैं। वहीं बैंक आरबीआई की गाइडलाइन का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि आरबीआई के उच्च अधिकारी ऐसी किसी भी गाइडलाइन से इनकार कर रहे हैं।

सिक्के अब लोगों के लिए जी जंजाल बनते जा रहे हैं। टाफी, गुब्बारे, माचिस, इरेजर जैसी छोटी चीजे बेचने वाले व्यापारी हों या अखबार और ब्रेड का धंधा कर रहे लोग, इनके पास छोटे सिक्कों का ढेर लग चुका है। लेकिन बैंक ये सिक्के बैंक जमा करने से इनकार कर रहे हैं।

 ग्राहकों की आपत्ति को देखते हुए बैंकों ने यह वादा किया था कि बाद में इन्हें आसानी से वापस 

नोटबंदी के समय छोटी नोट की कमी बताकर ग्राहकों को सिक्कों की थैलियां थमा दी गईं। यही नहीं जो छोटी नोट आरबीआई ने खराब होने या कटी-फटी होने के कारण वापस ले ली थीं उन्हें फिर से बैंकों के जरिए लोगों तक पहुंचा दिया गया। उस समय ग्राहकों की आपत्ति को देखते हुए बैंकों ने यह वादा किया था कि बाद में इन्हें आसानी से वापस ले लिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

शिकायतकर्ताओं के पास धीरे-धीरे सिक्कों की संख्या बढ़ते-बढ़ते अब लाखों रुपये हो चुकी है।घरों में लगे सिक्कों के ढेर : आलमबाग कृष्णानगर निवासी अनाविल मित्तल व्यवसायी हैं।

बैंक नोटबंदी के समय हमे ही सिक्कों की थैली दे चुकी 

इन्हें रोजाना हजारों रुपये के सिक्के मिलते हैं। जो सिक्के इनको मिले वह अब बैंक लेने से मना कर रही हैं। उनका कहना है कि पंजाब नेशनल बैंक में उनका खाता है। यही बैंक नोटबंदी के समय हमे ही सिक्कों की थैली दे चुकी है। इनमें एचडीएफसी, भारतीय स्टेट बैंक, यूनियन बैंक समेत कई अन्य बैंक भी शामिल हैं। यह केवल एक ग्राहक का दर्द नहीं है।

बल्कि इन्दिरानगर निवासी राजकुमार यादव, विकासनगर निवासी मदन सिंह, गोमतीनगर निवासी आनन्द प्रकाश पाठक ही नहीं बल्कि फैजाबाद निवासी अवि आनन्द, रायबरेली निवासी अखण्ड प्रताप सिंह और बहराइच निवासी राजू श्रीवास्तव भी शामिल हैं।

लघु उद्योग भारती के महामंत्री रवीन्द्र सिंह ने भारतीय रिजर्व बैंक, लखनऊ के महाप्रबंधक को एक पत्र लिखा 

ग्राहकों और फुटकर उत्पाद बेचने वाले व्यापारियों की परेशानी को देखते हुए अब व्यापारिक संगठन भी आवाज उठाने लगी हैं। लघु उद्योग भारती के महामंत्री रवीन्द्र सिंह ने भारतीय रिजर्व बैंक, लखनऊ के महाप्रबंधक को एक पत्र लिखकर कहा है कि अगर बैंक सिक्के जमा नहीं कर सकते तो इन्हें बैंकों द्वारा जारी क्यों किया गया। यही नहीं बड़ी संख्या में अब भी बैंक सिक्के जारी कर रही हैं।