Home Home बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को नया दांव, दिल में उतरने...

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार को नया दांव, दिल में उतरने की तैयारी

नई दिल्ली। शराबबंदी के बाद नीतीश कुमार बिहार में दो और बड़े सामाजिक दांव खेलने वाले हैं। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर नीतीश कुमार दहेज प्रथा और बाल विवाह को पूरी तरह बंद करने के लिए अभियान शुरू करेंगे। नीतीश के करीबियों के अनुसार वह इन अभियानों को शराबबंदी की तर्ज पर चलाने की कोशिश करेंगे। इसके लिए बिहार और राज्य से बाहर भी दौरा किया जाएगा।

बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून भी लाने की तैयारी 

जिस तरह शराबबंदी के पक्ष में उन्होंने सबसे लंबी मानव श्रंखला बनाई उसी तरह दहेज प्रथा के पक्ष में रेकॉर्ड संख्या में लोगों को शपथ दिलाएंगे कि न तो वे दहेज देंगे और न लेंगे। दहेज और बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून भी लाने की तैयारी है। समाज के हर तबके के लोगों को इस अभियान से जोड़ने की योजना है। हालांकि इस सामाजिक अभियान के बीच नीतीश कुमार का राजनीतिक समीकरण दिख रहा है। दरअसल नीतीश कुमार के महिला वोटरों को टारगेट करने के पीछे खास रणनीति है। बीजेपी के साथ आने के बाद जेडीयू को बिहार की राजनीति में कितना हिस्सा मिलेगा इस बारे में अभी से चर्चा का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी ने जहां सभी लोकसभा की 40 सीटों पर संगठन मजबूत करने का ऐलान किया तो जेडीयू ने भी ऐसा ही ऐलान कर दिया। यह ठीक इस घटना के बाद हुई कि जब जेडीयू को एनडीए में शामिल होने के बाद भी मोदी सरकार में जगह नहीं मिली।

महादलित और महिला वोटरों के सपोर्ट से नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में बड़े भाई की भूमिका

ऐसे में नीतीश कुमार 2019 से पहले अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत रखना चाहते हैं ताकि उनकी बार्गेन क्षमता बनी रहे। पंचायत में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने से लेकर शराबबंदी तक, राज्य में महिलाओं के बड़े तबके ने नीतीश कुमार को सपोर्ट किया था। महादलित और महिला वोटरों के सपोर्ट से नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में बड़े भाई की भूमिका बनाए रखना चाहते हैं। 2009 में जब जेडीयू और बीजेपी साथ लोकसभा चुनाव लड़ी थी तब जेडीयू 25 और बीजेपी 15 सीटों पर लड़ी थी लेकिन तब से लेकर अब तक हालात बहुत बदल गये हैं। बीजेपी अब बड़ा भाई होने का दावा करती है।

हालांकि जेडीयू नेता संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार के अभियान में राजनीति नहीं देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार बिहार के ऐसे नेता रहे हैं जो मुद्दों के बीच राजनीति नहीं आने देते हैं और यही उनकी मजबूती है। संजय झा ने कहा कि शराबबंदी के बाद इन दोनों अभियानों में भी पूरे राज्य की महिलाओं का सहयोग नीतीश को मिलेगा। जेडीयू-बीजेपी दोनों के 40-40 सीटों पर संगठन मजबूत करने की घोषणा के बारे में उन्होंने कहा कि अगर एनडीए को बिहार में सभी सीटों पर जीतना है तो सभी को एक दूसरे को सपोर्ट करना होगा और हर सीट पर अपना काडर मजबूत रखना होगा।

इसमें किसी तरह की मतभेद नहीं है। लेकिन सूत्रों के अनुसार आरजेडी-कांग्रेस से गठबंधन तोड़ने के बाद नीतीश कुमार बीजेपी के कई कदम और बयान से चिंतित हुए और 2019 से पहले अपनी जमीन किसी तरह कमजोर नहीं होना देना चाहते। इसके अलावा नीतीश कुमार आरजेडी और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को भी जेडीयू में शामिल कर पार्टी विस्तार को मजबूती देता चाहते हैं।