Home एंटरटेनमेंट न्यूटन’ चुनाव पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री फिल्म नहीं

न्यूटन’ चुनाव पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री फिल्म नहीं

न्यूटन’ चुनाव पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री फिल्म नहीं
न्यूटन’ चुनाव पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री फिल्म नहीं

मुंबई. हमारे देश में वोटिंग के बाद उनकी गिनती को लेकर शायद सबसे ज्यादा रोमांच इस बात को लेकर रहता है कि फलां उम्मीदवार ने फलां को कितने हजार या लाख वोटों से हराया। अब देश के एक ऐसे छोटे से गांव की कल्पना कीजिए, जहां सौ से भी कम वोटर हैं। ऐसे गांव में वोटिंग को लेकर कैसा रोमांच होगा? ‘न्यूटन’ चुनाव पर बनी कोई डॉक्यूमेंट्री फिल्म नहीं है।

इसकी कहानी इसके मुख्य पात्र की मौजूदा समाज को लेकर जटिलताओं और देश में चुनाव प्रक्रिया (किसी दूर-दराज इलाके में) का चित्रण है, जिसे हल्के-फुल्के हास्य व्यंग और कटाक्ष के रूप में पेश किया गया है। न्यूटन (राजकुमार राव) का ईमानदार व्यक्तित्व, उसकी ‘सही’ बातें, नेक स्वभाव और अच्छी आदतें अकसर दूसरों के लिए जटिलताएं बन जाती हैं। उसका पूरा व्यक्तित्व उन किताबों से आज भी घिरा है, जिन्हें वह अपना आदर्श मानता है।

एक दिन उसे माओवादियों से प्रभावित छत्तीसगढ़ के एक गांव में चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी जाती है। दंडकर्णय जंगल में उसे पीठासीन अधिकारी बना कर भेजा जाता है, जहां उसकी मुलाकात एक स्थानीय स्कूल टीचर माल्को (अंजलि पाटिल) व अर्ध सैनिक बल के मुखिया आत्मा सिंह (पंकज त्रिपाठी) से होती है।

गांव से केवल 76 वोट डलने हैं, लेकिन ये काम इतना मुश्किल होगा, न्यूटन ने सोचा भी नहीं था। शायद ये कहानी आपको कम आकर्षित करे, लेकिन जिस अंदाज में अमित मासुरकर ने इसे बयां किया है, वह कमाल है।

इस पौने दो घंटे की फिल्म के एक-एक पल में रस है। देश की चुनाव व्यवस्था और उनकी जटिलाओं का वो सच है, जिसे शायद हम खबरों में कभी न देख पाएं। बदलाव का एक ऐसा जज्बा है, जिसे हम कई बार चाहते सब हैं, पर हाथ खींच लेते हैं। राजकुमार राव ने एक बार फिर साबित किया है कि उनका कोई विकल्प नहीं है।

पंकज त्रिपाठी बार-बार ये जता रहे हैं कि आज के दौर में चरित्र कलाकारों की अहमियत ‘स्टारों’ से कहीं ज्यादा है। सीधे शब्दों में कहें तो ‘न्यूटन’ नई सदी की ‘जाने भी दो यारो’ है, जिसकी मारक क्षमता इसके किरदारों और अभिनय में दिखती है।वि. ठाकुर

फिल्म: न्यूटनलेखक व निर्देशक: अमित मासुरकरकलाकार: राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, अंजलि पाटिल, रघुवीर यादव गीतकार: वरुण ग्रोवर