Home उत्तर-प्रदेश गैस पर हैंडबाॅल रखकर आग लगा दी थी, 2दिन तक नहीं खाया...

गैस पर हैंडबाॅल रखकर आग लगा दी थी, 2दिन तक नहीं खाया खाना

लखनऊ। यूपी की रहने वाली मंजुला पाठक को हैंडबाॅल में गोल्ड मेडल मिलने पर उन्हें रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार देकर सम्मानित किया। मंजुला पाठक ने Ankhondekhi.com से बातचीत के दौरान बताया कि- मेरे पापा को मेरा खेलना पसंद नहीं था, उन्होंने मना किया तो मैंने हैंडबाॅल को गैस पर रखकर आग लगा दी थी। 2दिन तक खाना नहीं खाया, उसके बाद पापा ने कहा मैं हर बार मैच में खुद ले चलूंगा।
स्कूल में कोई और गेम था ही नहीं, इस लिए चुना हैंडबाॅल, प्राइवेट ही पढ़ाई की
– बेसिकली मैं देवरिया की रहने वाली हूं, मेरी हाईस्कूल से बीए तक की पढ़ाई वहीं से हुई।
– 2005 से मैंने स्कूल से गेम शुरू किया, उस वक्त 9वीं क्लास में थी, 2006में मैंने हाईस्कूल पास होेते होते पूरे जिले में खेलने के लिए जानें लगी थी।
– मेरे स्कूल में सिर्फ तीन ही गेम थे, हाॅकी, हैंडबाॅल, एथलेटिक, और किसी गेम के ग्राउंड भी नहीं थे।
– इस वजह से मुझे हैंडबाॅल चुनना पड़ा, पहली बार 2009 में स्टेट लेवल चैम्पियनशिप खेलने के बाद मुझे लगा कि मैं भी कुछ कर सकती हूं।
हैंडबाॅल गैस पर रखकर आग लगा दी, पापा साथ जानें लगे प्रैक्टिस में 
– मैं बहुत छोटे से शहर से हूं जहां लड़कियों का ज्यादा बाहर निकलना, या घर और स्कूल के बाहर किसी प्रकार की बातचीत किसी से गलत माना जाता है।
– पापा टीचर हैं, उन्हें बाहर की बहुत ज्यादा हाईफाई दुनिया पसंद नहीं है।
– वो हमेशा से चाहते थे कि मैं पढ़ाई करूं और टीचर बनूं। एक बार स्टेडियम से खेलने के बाद मैं अपनीं फ्रेंड्स के साथ घर आते हुए ‘हाॅफ लोअर-टीशर्ट में हेडफोन लगाकर मस्ती करते हुए चल रही थी।‘
– उसी रास्ते से पापा आ रहे थे, उन्हेांने मुझे देखा, और घर आते ही गुस्सा करने लगे, मां से बोले आज के बाद हैंडबाॅल खेलने नहीं जाना है। स्टेडियम में टहलना भी बंद। सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दो।
– उस दिन मैं बहुत रोई थी, पापा ने बहुत डांटा था वो बोले ऐसा आज तक पूरे खानदान में सड़कों पर कोई नहीं घूमा ये पूरे समाज में गलत मेसेज जाएगा।
– इतना सब सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने हैंडबाॅल उठाकर गैस पर रखकर उसे आग लगा दी थी। और कहा जब हैंडबाॅल नहीं खेलना तो हैंडबाॅल से जुड़ी हर चीज मिटा दूंगी।
– उसके बाद 2दिन तक खाना नहीं खाया, मम्मी पापा में बहुत लड़ाई हुई थी, बहुत सारे लोगों ने समझाया खाना खा लो, सब ठीक हो जाएगा।
– मम्मी के लगातार लड़ते रहने के बाद पापा ने कहा ठीक है खेला लेकिन कहीं भी खेलने जाओगी, तो साथ मैं चलूंगा। मैंने कहा ठीक है।
– उसी के बाद मुझे स्टेट लेवल खेलने लखनऊ स्टेडियम आना था, तो मेरे साथ आए, मेरा परर्फामेंस के बाद कोच, सेलेक्टर, और अन्य कई लोगों ने तारीफ की, पापा को भी मेरा खेलना बहुत अच्छा लगा। उसके बाद पापा ने कहा कि कभी नहीं रोका।
पाकिस्तान में लोगों के कमेंट मिले थे, लेकिन कुछ लोगो ंने सपोर्ट भी किया
– पहली बार मुझे 2009 में छत्तीसगढ़ नेशनल लेवल कैम्प में खेलने का मौका मिला, छत्तीसगढ़ में मैच होना था, पर वहां मुझे खेलने को नहीं मिला।
– मेरा पर्रफार्मेंस पिछली बार अच्छा नहीं था, वहां मुझे टीम से बाहर बैठाया गया, और मैं खेल रहे अन्य सीनियर प्लेयर को पानी देने का काम कर रही थी।
– मुझे वो अपनी बेज्जती महसूस हो रही थी। वापस आकर जहां लोग 2टाइम प्रैक्टिस करते थे, तो मैं तीन बार प्रैक्टिस करने लगी, मैं अपने कमरे में भी प्रैक्टिस करने लगी।
– उसके बाद ही मुझे साउथ एशियन गेम्स गोल्ड मेडल मिला। एक बार पाकिस्तान में एशियन इंटरनेशनल खेलनीं गई थी। तो वहां फील्ड पर कुछ लोग चिल्ला रहे थे, इंडियन चोर आए हैं, हराकर भगाओ इनको।
– लेकिन उसमें मैं कैप्टन थी, मैंने सोच लिया था कि यहंा जीतकर ही जाउंगी, वरना गेम बंद। और उसमें हमें सिल्वर मेडल मिला। उसके बाद कई लोग ऐसे मिले जिन्होंने हमारे खेल को बहुत पसंद किया, उन्होंने सबके सामने हमारी तारीफ की।
– इस वक्त मुझे रेलवे गोरखपुर में नौकरी मिली हुई है। जब वहां गई तो कुछ दिन तक जाॅब भी करनी पड़ी थी। लेकिन मैं इतना प्रैक्टिस करती थी, कि मेरी 365दिन में से 250दिन छुट्टी लेनी पड़ती थी, क्योंकि थकान की वजह से जाॅब नहीं हो पा रही थी।
– फिर मेरे स्पोट्स कोच, आफिसर और इंचार्ज सभी ने मिलकर टाॅप लेवल पर बात की, कि मुझे खेलने दिया जाए, और फाइनली मैं पूरे टाइम प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल गई।
– इस वक्त मैं 2017 के लास्ट में होने वाले उजबेकिस्तान में होने वाली इंटरनेशनल चैम्पियनशिप की तैयारी करने के लिए महाराष्ट्र के औरंगाबाद में जा रही हूं।