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सीएम योगी हुये सख्त तीन चकबंदी अधिकारी बर्खास्त, सात को अनिवार्य अवकाश प्राप्त दो पर विभागीय कार्रवाई

सीएम योगी हुये सख्त तीन चकबंदी अधिकारी बर्खास्त, सात को अनिवार्य अवकाश प्राप्त दो पर विभागीय कार्रवाई
सीएम योगी हुये सख्त तीन चकबंदी अधिकारी बर्खास्त, सात को अनिवार्य अवकाश प्राप्त दो पर विभागीय कार्रवाई

लखनऊ. मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार व भूमाफिया के विरुद्ध छेड़े गये अभियान के तहत को चकबन्दी विभाग में बड़ी कार्रवाई हुई। विभाग के एक दर्जन अधिकारियों को गंभीर आरोपों के कारण विभाग से बाहर कर दिया गया है। चकबन्दी आयुक्त की अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग कमेटी ने जहां 50 वर्ष से अधिक आयु के सात अक्षम अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी वहीं राजस्व क्षति पहुंचाने के कारण तीन को बर्खास्त कर दिया गया। इसके अलावा दो के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की गयी है।

चकबन्दी आयुक्त डा. रजनीश दुबे ने बताया कि जिन अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया गया है उनमें बांदा में तैनात बंदोबस्त अधिकारी प्रमोद कुमार त्रिपाठी, संत रविदास नगर (भदोही) के चकबन्दी अधिकारी ओमकार नाथ, उन्नाव में तैनात सहायक चकबन्दी अधिकारी गिरीश कुमार द्विवेदी, एटा के सहायक चकबन्दी अधिकारी राज कुमार शर्मा, बिजनौर में तैनात सहायक चकबन्दी अधिकारी वेद प्रकाश सिंह, बलिया के सहायक चकबन्दी अधिकारी रमेश कुमार तथा सहारनपुर में तैनात सहायक चकबन्दी अधिकारी वीर विक्रम गौड़ शामिल हैं।

स्क्रीनिंग कमेटी ने प्रमोद कुमार त्रिपाठी बंदोबस्त अधिकारी बांदा को अवैध धनराशि स्वीकार करते हुए ट्रैप केस में जनपद इटावा में की गयी अनियमितताओं के लिए भी दोषी पाया था। इसी तरह ओमकार नाथ चकबन्दी अधिकारी संत रविदासनगर को 27 अक्टूबर 2001 चकबन्दी अधिकारी के मूल वेतन पर प्रत्यावर्तित तथा लघु दण्ड दिया गया था।

वर्ष 2011 में दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकी गयी थीं। इनकी दो बार परिनिन्दा भी की गयी थी तथा 2016 से वह निलम्बित चल रहे थे। गिरीश कुमार द्विवेदी सहायक चकबन्दी अधिकारी उन्नाव पर एक वृहद दंड, एक परिनिन्दा तथा तीन अलग-अलग वृहद दण्ड के विरुद्ध राज्य लोक सेवा अधिकरण में याचिका विचाराधीन थी।

इसके अलावा एक लघु दंड व सत्यनिष्ठा संदिग्ध होने के विरुद्ध राज्य लोक सेवा अधिकरण में याचिका लम्बित पायी गयी तथा एक लघु दंड के विरुद्ध शासन में प्रतिवेदन लम्बित है। राज कुमार शर्मा सहायक चकबन्दी अधिकारी एटा के विरुद्ध एक वृहद दंड और लघु दंड अन्तिम तथा एक वृहद दंड के विरुद्ध शासन में प्रत्यावेदन लम्बित था।

इसके अलावा वेद प्रकाश सिंह सहायक चकबन्दी अधिकारी बिजनौर के विरुद्ध एक वृहद तथा लघु दंड तथा एक वृहद व एक लघु दंड के विरुद्ध निर्देश याचिका के आदेश 30 अगस्त 2016 के अनुपालन में शासन स्तर पर अपील प्रार्थना पत्र नहीं भेजा गया था। इसके अलावा एक अन्य कार्रवाई में लघु दंड दिया गया था।

चकबन्दी अधिकारी बलिया को दो अलग-अलग वृहद दंड एवं लघु दंड दिया

इसी तरह रमेश कुमार सहायक चकबन्दी अधिकारी बलिया को दो अलग-अलग वृहद दंड एवं लघु दंड दिया गया था जबकि वीर विक्रम गौड़ सहायक चकबन्दी अधिकारी सहारनपुर को तीन अलग-अलग वृहद दंड व लघु दंड अन्तिम रूप से दिये गये थे।उन्होंने बताया कि इसी तरह सहारनपुर में तैनात चकबन्दी अधिकारी रामकेश कटियार, मुजफ्फरनगर में तैनात चकबन्दी अधिकारी सचेन्द्र बहादुर सिंह तथा लखनऊ में तैनात चकबन्दी अधिकारी राम किशोर गुप्ता को बर्खास्त कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि चकबन्दी अधिकारी रामकेश कटियार ने अपने कारनामों से तीन मामलों में राज्य सरकार को कुल 41.65 एकड़ भूमि की क्षति पहुंचायी।

इसी तरह चकबंन्दी अधिकारी सचेन्द्र बहादुर सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों से कुल 192.31 एकड़ भूमि की राज्य सरकार को क्षति पहुंचायी है। इसी प्रकार लखनऊ में तैनात चकबंदी अधिकारी राम किशोर गुप्ता ने विभिन्न क्षेत्रों की कुल 57.37 हेक्टेयर भूमि की राज्य सरकार को क्षति पहुंचायी।

इसी कारण राज्य सरकार ने इन तीन चकबंदी अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। इसके अलावा अमरोहा में तैनात चकबन्दी अधिकारी अजब सिंह तथा सहायक चकबन्दी अधिकारी लक्ष्मीकान्त सरोज को प्रारम्भिक मूल वेतन पर प्रत्यावर्तित किया गया है।

विभाग के इन तीन अधिकारियों को ग्राम सभा की सम्पत्तियां तथा यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भूमि को निजी खातेदारों को चक के रूप में आवंटित करने पर बर्खास्त किये जाने तथा दो अधिकारियों को उनके प्रारम्भिक मूल वेतन पर प्रत्यावर्तित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि इन अधिकारियों ने अपनी तैनाती के दौरान यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर की भूमि के अधिग्रहण के पहले ग्राम जगनपुर, अफजलपुर, अट्टा आदि और जनपद हरदोई के ग्राम मल्हेरा में विधि विरुद्ध आदेश पारित कर ग्राम सभा की सम्पत्तियों को निजी खातेदारों के चकों में दिखाने का दोषी पाया गया है। इन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रचलित विभागीय कार्रवाई के आधार पर दण्डित किया गया है।
जीतेन्द्र शुक्ल