Home उत्तर-प्रदेश फर्जी डिग्रियां बनाकर बेचने वाले गिरफ्तार, 5हजार में हाईस्कूल, 30हजार में डाक्टरी

फर्जी डिग्रियां बनाकर बेचने वाले गिरफ्तार, 5हजार में हाईस्कूल, 30हजार में डाक्टरी

लखनऊ। राजधानी में जालसाजों ने एक-दो नहीं बल्कि आठ फर्जी शिक्षा बोर्ड गठित करके हजारों लोगों को जाली डिग्रियां बांट डाली। छह साल से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे गैंग के चार सदस्यों को क्राइम ब्रांच ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पांच हजार में हाईस्कूल व 30 हजार में फर्जी बीएएमएस डिग्री बेचते थे। इनके पास से 400 जाली मार्कशीट, मार्कशीट में इस्तेमाल होने वाले पेपर के 800 शीट्स, विभिन्न बोर्ड की 184 मोहरें, तीन लैपटॉप, व विशेष तरह की स्याही बरामद हुई है।

एक फ्लैट में आठ शिक्षा बोर्ड का ऑफिस
गैंग का मास्टरमाइंड मनीष प्रताप सिंह उर्फ मांगेराम इस समय राजस्थान की बाडमेर जेल में बंद है। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि पुलिस मनीष से पूछताछ करके गैंग के अन्य लोगों का भी पता लगाएगी। एक फ्लैट में आठ शिक्षा बोर्ड का ऑफिस एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर अरुण कुमार मिश्र को सूचना मिली थी, कि कैसरबाग स्थित सेठी कॉम्पलेक्स के एक फ्लैट में कुछ लोग फर्जी मार्कशीट बनाने व बेचने का काम कर रहे हैं। इस पर क्राइम ब्रांच की टीम ने गुपचुप तरीके से जांच की तो मामला सही निकला।

पेपर 800 पीस, विभिन्न बोर्ड की 184 मोहरें
रविवार को क्राइम ब्रांच और कैसरबाग पुलिस ने फ्लैट में छापा मारा तो चार लोग फर्जी मार्कशीट, सर्टिफिकेट तैयार करते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। आरोपियों की पहचान मथुरा निवासी अमित सिसोदिया, बिहार निवासी शाही अहमद, हरदोई निवासी विकास श्रीवास्तव व हुसैनगंज निवासी खालिद कादरी के रूप में हुई है। पुलिस ने फ्लैट की तलाशी लेते हुए 400 फर्जी मार्कशीट प्रमाण पत्र, शीट बनाने वाला पेपर 800 पीस, विभिन्न बोर्ड की 184 मोहरें समेत अन्य सामान बरामद किया।

हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, विभिन्न विषयों के ग्रेजुएशन व बीएएमएस की डिग्रियां
आरोपी अमित सिसोदिया ने पूछताछ में बताया कि वह लोग ऑन डिमाण्ड डिग्री उपलब्ध कराते थे। वह लोग हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, विभिन्न विषयों के ग्रेजुएशन व बीएएमएस की डिग्रियां बनाकर बेचते थे। अमित के मुताबिक वह लोग हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की मार्कशीट व प्रमाण पत्र के एवज में 5 से 10 हजार, ग्रेजुएशन की डिग्री के लिये 10 से 20 हजार रुपये और बीएएमएस की डिग्री के लिये 20 से 30 हजार रुपये तक वसूलते थे। प्रधान को चूना लगाने पर पकड़ा गया मास्टरमाइंड एसआई उदय प्रताप सिंह ने बताया कि गैंग का सरगना गाजियाबाद निवासी मनीष प्रताप सिंह उर्फ मांगेराम है।
वर्ष 2011 में दिल्ली की तीमारपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा था। जेल से छूटने के बाद वह राजस्थान चला गया और वहां रहकर फर्जी डिग्री का काम करने लगा। मनीष ने बाडमेर के एक प्रधान को जाली डिग्री बेची थी। प्रधान के विरोधी ने उसकी शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। जब जांच हुई तो प्रधान की डिग्री फर्जी निकली। इसी के बाद पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ करीब 100 मुकदमे दर्ज हैं। एसएसपी ने बताया कि इस समय मनीष का बेटा सत्येन्द्र प्रताप सिंह और भतीजा नकुल प्रताप सिंह फर्जी डिग्री के गैंग की कमान संभाले हैं। उनकी तलाश की जा रही है।

जालसाजों को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार, 6फर्जी बोर्ड बनाए थे

एसआई उदय प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपियों ने भारतीय विद्यालयी शिक्षा संस्थान, राजकीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान, बोर्ड ऑफ हॉयर सेकेंडरी एजुकेशन दिल्ली, राज्य मुक्त विद्यालय परिषद, उत्तर प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालय परिषद, महाकौशल आयुर्वेदिक बोर्ड जबलपुर, राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड उत्तर प्रदेश, केंद्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षण संस्थान गठित कर रखे थे।

विभिन्न बोर्ड के सरकारी गजट तैयार

शातिर जालसाजों ने इन बोडरें की वेबसाइट भी संचालित कर रखी थी। ताकि, लोगों को आसानी से झांसे में ले सके।सरकारी गजट दिखा देते थे झांसाइंस्पेक्टर कैसरबाग डीके उपाध्याय ने बताया कि जालसाजों ने लोगों को झांसा देने के लिए विभिन्न बोर्ड के सरकारी गजट तैयार कर रखे थे। उक्त गजट में आरोपियों ने खुद को अध्यक्ष व सचिव घोषित कर रखा था। हूबहू असली से दिखने वाले इन गजट को देखकर कोई भी शख्स आरोपियों के झांसे में आ जाता था।