Home Odd News मुंबई में छह महीने में 382 लीटर खून हुआ बेकार

मुंबई में छह महीने में 382 लीटर खून हुआ बेकार

मुंबई में छह महीने में 382 लीटर खून हुआ बेकार
मुंबई में छह महीने में 382 लीटर खून हुआ बेकार

मुंबई. खून शरीर का बेहद महत्वपूर्ण घटक है। कई बार समय पर खून नहीं मिलने से इनसान की जान तक पर बन जाती है। प्रशासन की उदासीनता के चलते मुंबई में केवल छह महीने में 300 लीटर से अधिक खून पानी बन गया। यह बात सामने आई है महाराष्ट्र स्टेट ब्लड ट्रांफ्यूजन काउंसिल (एसबीटीसी) की वेबसाइट पर ब्लड बैंको द्वारा खून को लेकर दी गई जानकारी में।

कुछ दिन पहले ही एसबीटीसी द्वारा सभी बैंको को खून से संबंधित सभी जानकारियां ऑनलाइन करने को कहा गया था। विशेषज्ञों की मानें तो खून के आदान -प्रदान के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने और ब्लड बैंको की लापरवाही के चलते इतनी बड़ी मात्रा में इस्तेमाल से पहले ही खून बेकार हो गया। सबसे अधिक खून जेजे अस्पताल स्थित जेजे महानगर ब्लड बैंक में बर्बाद हुआ।

जेजे महानगर में जनवरी से लेकर 30 जून तक 268 यूनिट खून बेकार हो गया। इसी तरह खारघर स्थित टाटा हॉस्पिटल में 230 यूनिट खून इस्तेमाल करने से पहले ही खराब हो गया।

वेबसाइट पर अपलोड 17 ब्लड बैंकों की जानकारी के अनुसार इन ब्लड बैंकों में छह महीने में 1092 यूनिट यानी तकरीबन 382 लीटर खून बर्बाद हुआ है। इन ब्लड बैंकों में सरकार के नौ जबकि कॉर्पोरेशन के आठ बैंक शामिल हैं।

ब्लड बैंक से जुड़े एक अधिकारी ने बताया खून के आदान-प्रदान को लेकर अक्सर बैंको द्वारा लपरवाही बरती जाती है। नियमानुसार खून को केवल 35 दिनों तक ही इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उस खून को पहले इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिसका कलेक्शन पहले हुआ है।

35 दिन के बाद खुद ब खुद खून एक्सपायर हो जाता है। इस स्थिति को विभिन्न ब्लड बैंको के बीच आपसी तालमेल से टाला जा सकता है, लेकिन किसी भी ब्लड बैंक ने अपने बेकार हो रहे खून के इस्तेमाल के लिए दूसरे ब्लड बैंकों से संपर्क नहीं किया। यह समस्या अक्सर तब पैदा हो जाती है,

जब एक साथ बहुत सारे रक्त शिविरों से ज्यादा मात्रा में रक्त एकत्र हो जाता है, लेकिन निश्चित समयावधि में इस्तेमाल नहीं हो पाता। मुंबई में कुल 61 ब्लड बैंक हैं।

अगर ये आपस में एक दूसरे के तालमेल से काम करें, तो रक्त की बर्बादी की समस्या से निजात पाई जा सकती है।